Thursday, November 22, 2018

يتحدثون عن صواريخ نووية روسية إلى كوبا

"أزمة كاريبي جديدة تهدد العالم"، عنوان مقال دميتري روديونوف، في "سفوبودنايا بريسا"، حول تخوف الغرب من صواريخ روسية في كوبا ردا على انسحاب واشنطن من معاهدة الصواريخ النووية.
وجاء في المقال: قد تقوم روسيا بإحياء المنشآت العسكرية في كوبا، بل وإنشاء مواقع جديدة. وهذا سبب ظهور القلق في الغرب. حول ذلك ، كتبت صحيفة ديلي ستار البريطانية، محيلة إلى مؤسسة جيمس تاون للأبحاث. فوفقا لمؤلفي المادة، تخشى الدول الغربية من أن ترد موسكو على تهديدات الرئيس الأمريكي دونالد ترامب بالانسحاب من معاهدة الصواريخ المتوسطة وقصيرة المدى بفتح قواعد روسية جديدة في كوبا.
وفي الصدد، قال المحلل السياسي في منظمة المراقبة الدولية  ، ستانيسلاف بيشوك:
المزاج العام اليوم في العالم هو القلق، والولايات المتحدة وروسيا ليستا استثناء هنا.
فالولايات المتحدة، تعرب عن قلقها من أن روسيا تتصرف "بطريقة خاطئة"؛ وفي الطرف الآخر، تشعر موسكو بالقلق من السلوك "الخاطئ" لواشنطن. وهكذا، فمن أجل تحييد الخطر، يلجآن إلى تعزيز أمنهما الخاص، بما في ذلك في مجال الصواريخ، محاولين وضع عناصر دفاعهما الصاروخي (وهي أيضا عناصر هجومية)، بشكل استباقي، في نقاط غير مقبولة للعدو المقصود.
هناك حاجة بالتأكيد لقواعد للجيش الروسي في دول مثل كوبا أو حتى سورية. مسألة أخرى استحالة الدفاع عن مثل هذه المواقع البعيدة بشكل فعال في حال وقوع هجوم عليها. ومع ذلك، فإذا كانت هناك حاجة ماسة للرد على واشنطن بشكل غير متناظر، فإن كوبا ليست الخيار الأسوأ.
هل من الممكن تكرار أزمة الكاريبي في حال انسحاب الولايات المتحدة من معاهدةالصواريخ المتوسطة وقصيرة المدى،أو حتى معاهدة الأسلحة الهجومية الاستراتيجية؟
حدثت الأزمة الكاريبية في عالم ثنائي القطب وبوجود مواجهة إيديولوجية حقيقية. ومع ذلك، فحتى الدول المناهضة، في ذلك الحين، فعلت كل ما هو ممكن للحيلولة دون تحول الأزمة إلى صدام عسكري. في عالم اليوم المؤتمت، السؤال ليس ما إذا كان أحد ما في واشنطن أو موسكو سيضغط على "الزر النووي"، إنما إلى أي مدى يمكن تجنب خطر الإطلاق غير المقصود للصواريخ من أحد الطرفين والرد التلقائي من الطرف الآخر...
تحت العنوان أعلاه، كتب أناتولي كومراكوف، في "نيزافيسيمايا غازيتا"، حول احتمال عدم السماح بمد خط أنابيب "السيل التركي" إلى أوروبا، والخيارات البديلة.
وجاء في المقال: تستمر روسيا في بناء شبكة من خطوط أنابيب نقل الغاز الاستراتيجية التي تتجاوز أوكرانيا. الاثنين، شارك رئيسا روسيا وتركيا، فلاديمير بوتين ورجب طيب أردوغان، في مراسم تدشين الجزء البحري من خط أنابيب "السيل التركي".
ولكن، إذا كان مصير نصف خط "السيل التركي" قد حُسم، فليس هناك وضوح فيما يخص النصف الثاني. سيتم إيصاله إلى حدود أوروبا، ولكن لا يزال يتعين تحديد ما إذا كانوا سيسمحون بمده هناك، وإذا وافقوا على ذلك، فعبر أي طريق.
وفقا للمحلل في مؤسسة أمن الطاقة الوطنية، إيغور يوشكوف، ستدفع شركة غازبروم الخط الثاني من "السيل التركي" بالطريقة التي دفعت بها "السيل الشمالي-2".
وأوضح يوشكوف "أن أكثر الطرق ربحيةً ودراسة من الناحية الفنية هو الطريق من تركيا إلى بلغاريا، ثم إلى صربيا والمجر والنمسا... وأن الجانب السلبي من هذا الطريق هو عدم ثقة روسيا بالسلطات البلغارية".
والأمر الإيجابي هو أن "السيل الشمالي- 2" قد أرسى سابقة: أثبت الألمان أن خط أنابيب الغاز من روسيا إلى أوروبا ليس مشروعا سياسيا. وقال يوشكوف: "إذن، سوف يتمكن البلغاريون من القول: بما أن السيل الشمالي-2 مشروع اقتصادي ويجري بناؤه، فإن هذا يعني أن" السيل التركي "هو أيضًا مشروع اقتصادي ويمكن بناؤه".
ووفقا ليوشكوف، يعمل لمصلحة الخط الثاني - من تركيا إلى اليونان وإلى إيطاليا - الاتفاق الحكومي بين روسيا وتركيا على أن القسم الثاني من "السيل التركي" سيمر عبر تركيا إلى الحدود مع اليونان وليس بلغاريا.
لكن الخيارات لا تنتهي عند هذا الحد. فضيف الصحيفة يشير إلى خيار ثالث: "يتعلق الأمر ببناء أنبوب، من اليونان عبر مقدونيا وصربيا إلى النمسا".
تتلخص الميزة الرئيسية لـ"السيل التركي" في التفافه على أراضي أوكرانيا: يتم التخلص من المخاطر السياسية. والعيب الرئيس هو عدم اليقين من إنجاز المشروع الجديد، حتى مع مثل هذا الحجم الكبير من إمدادات الغاز

Tuesday, November 6, 2018

लोकसभा सीट पर दूसरे राउंड की गिनती में

कर्नाटक उपचुनाव 2018: मांड्या लोकसभा सीट में पांचवें राउंड की गिनती के बाद जेडीएस बीजेपी से करीब 1,09,066 वोटों से आगे चल रही है. (ANI)

-कर्नाटक उपचुनाव 2018: बेल्लारी लोकसभा सीट से पांचवें राउंड की गिनती के बाद कांग्रेस के वीएस उगरप्पा बीजेपी के जे शांता से करीब 84257 वोटों से आगे चल रहे हैं. (ANI)

-कर्नाटक उपचुनाव 2018: बेल्लारी लोकसभा सीट से चौथे राउंड की गिनती के बाद कांग्रेस के वीएस उगरप्पा बीजेपी के जे शांता से करीब 64000 वोटों से आगे चल रहे हैं. ( )

- कर्नाटक उपचुनाव 2018: शिमोगा लोकसभा सीट पर दूसरे राउंड की गिनती में जेडीएस के एस मधुबंगरपप्पा बीजेपी के बीवाई राघवेंद्र से 1414 वोटों से आगे चल रहे हैं.
- कर्नाटक उपचुनाव 2018: शिमोगा लोकसभा सीट पर दूसरे राउंड की गिनती में जेडीएस के एस मधुबंगरपप्पा बीजेपी के बीवाई राघवेंद्र से 1414 वोटों से आगे चल रहे हैं. - कर्नाटक उपचुनाव 2018: जामखंडी विधानसभा सीट से कांग्रेस के आनंद सिद्दू करीब 9555 वोटों से आगे चल रहे हैं. वहीं बेल्लारी लोकसभा सीट से कांग्रेस के वीएस उगरप्पा 64000 वोटों से आगे और रामनगरम विधानसभा सीट से 18466 से अनीता कुमारस्वामी आगे. - कर्नाटक उपचुनाव 2018: बेल्लारी लोकसभा सीट से कांग्रेस के वीएस उगरप्पा तीसरे राउंड की गिनती में बीजेपी के जे शांता से करीब 45808 वोटों से आगे चल रहे हैं. - कर्नाटक उपचुनाव 2018: शिमोगा लोकसभा सीट से पहले राउंड की गिनती में बीजेपी के बीवाई राघवेंद्र जेडीएस के मधुबंगरप्पा से करीब 3906 वोटों से आगे चल रहे हैं. -कर्नाटक उपचुनाव: जामखंडी विधानसभा सीट से चौथे राउंड की गिनती के बाद कांग्रेस का आनंद सिद्दू बीजेपी के कुलकर्णी श्रीकांत सुबाराव से करीब 7 हजार वोटों से आगे. वहीं, रामनगर विधानसभा सीट से तीसरे राउंड की गिनती के बाद जेडीएस की अनीता कुमारस्वामी बीजेपी के एल चंद्रशेकर से करीब 14 हजार वोटों से आगे चल रही हैं. - कर्नाटक उपचुनाव 2018: पहले राउंड की गिनती के बाद बेल्लारी लोकसभा सीट से कांग्रेस के वीएस उगरप्पा बीजेपी के जे शांता से 17480 वोटों से आगे चल रहे हैं.- कर्नाटक उपचुनाव 2018: तीसरे राउंड की गिनती के बाद जामखंडी से कांग्रेस के आनंद सिद्दू न्यामागौड़ा बीजेपी के श्रीकांत सुबाराव से करीब 55433 वोटों से आगे चल रहे हैं. वहीं, रामनगर सीट से दूसरे राउंड की गिनती के बाद जेडीएस की अनीता कुमारस्वमी बीजेपी के चंद्रशेखर से करीब 8430 वोटों से आगे चल रही हैं. (स्रोत- एएनआई) - बेल्लारी मतगणना केंद्र की तस्वीर... - कर्नाटक उपचुनाव 2018: शिमोगा, बेल्लारी, मांड्या लोकसभा सीटों और रामनगर, जामखंडी विधानसभा सीटों के लिए गिनती शुरू. चुनाव अधिकारियों  के मुताबिक, कुल 1248 मतगणना कर्मी तैनात किये गए हैं. लोकसभा की तीनों सीटों में से पिछली बार की दो जीत बीजेपी का जहां मनोबल ऊंचा रखेगी. वहीं, विधानसभा चुनाव में मिली कामयाबी से कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन अपने को भी कमतर नहीं आंकेगी. बता दें कि मई में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाई थी. हालांकि, सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी थी. इस लिहाज से बीजेपी के पास बदला लेने का मौका है.

कर्नाटक की तीन लोकसभा सीटों शिमोगा, बेल्लारी (अजजा) व मांड्या तथा दो विधानसभा सीटों रामनगरम व जामखंडी पर शनिवार को औसतन 67 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था. इनमें से बेल्लारी (अजजा) सीट पर 63.85 फीसदी, मांड्या में 53.93 फीसदी, शिमोगा में 61.05 फीसदी, रामनगरम में 81.58 फीसदी तथा जामखंडी सीट पर 73.71 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था.

शिमोगा लोकसभा सीट से कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के पुत्र बीवाई राघवेंद्र मैदान में हैं, जबकि रामनगरम विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की पत्नी अनिता कुमारस्वामी किस्मत आज़मा रही हैं. तीन लोकसभा सीटों पर 17 तथा दो विधानसभा सीटों पर 14 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन मुकाबला मुख्य रूप से राज्य में सत्तासीन कांग्रेस-JDS गठबंधन तथा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच है.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मतगणना के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हो यह सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किये गए हैं.  

लोकसभा सीटें:
बेल्लारी लोकसभा सीट पर कांग्रेस और बीजेपी में मुख्य टक्कर है. इस सीट से जहां कांग्रेस ने वीएस उगरप्पा को मैदान में उतारा है, वहीं बीजेपी ने जे शांता को. हालांकि, 2014 में यह सीट बीजेपी के ही खाते में थी और बी श्रीरामुलू ने यहां जीत दर्ज की थी. 

शिमोगा लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में जेडीएस के एस मधुबंगारप्पा अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. वहीं, बीजेपी की ओर से बीवाई राघवेंद्र मैदान में हैं. इस सीट से कुल चार प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे हैं. बता दें कि 2014 में इस सीट पर बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा ने जीत दर्ज की थी. 

मांड्या लोकसभा सीट से जेडीएस ने एल आर शिमरामेगौड़ा को चुनाव में उतारा है, वहीं बीजेपी की ओर से डॉ सिद्धारमैया हैं. यह सीट पहले जेडीएस के खाते में ही थी. साल 2014 में जेडीएस के सीएस पुत्ताराजू ने जीत दर्ज की थी.

विधानसभा सीटें:
जामखंडी विधानसभा सीट से कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने है. कांग्रेस की ओर से जहां आनंद सिद्दू न्यामागौड़ा चुनावी मैदान में हैं, वहीं बीजेपी की ओर से श्रीकांत कुलकर्णी सुबराव अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. हालांकि, 2018 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के सिद्दू भीमप्पा न्यामागौड़ा ने जीत दर्ज की थी.


टिप्पणियां
रामनगर विधानसभा सीट पर जेडीएस और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला है. जेडीएस ने जहां अनिता कुमारस्वामी को मैदान में उतारा है, वहीं बीजेपी ने एल चंद्रशेखर को

Monday, October 15, 2018

नज़रिया: क्या वाक़ई नरेंद्र मोदी और अमित शाह को काले रंग से डर लगता है?

वैसे निशा में लड़कों वाली ताक़त भी है. घर पर जब मज़ाक में हम दोनों में हाथापाई हो जाती है तो उसे हरा पाना आसान नहीं होता. कई बार तो वो मुझे ही गिरा देती है.
पहले मेरे बहुत दोस्त थे. लेकिन अब ज़्यादातर पीछे छूट गए हैं क्योंकि वो मुझसे किन्नरों से दोस्ती करवाने के लिए कहते थे.
उनका दिमाग सिर्फ़ सेक्स तक सीमित था. वो न तो किन्नरों को लेकर गंभीर थे और न ही मेरी सोच समझते थे.
निशा के समूह की मुखिया मुझे अपने दामाद की तरह इज्ज़त देती हैं.
निशा ने शादी से पहले घर छोड़ा था. इस बात को दस साल से ज़्यादा हो गए हैं. तब से लेकर आज तक उसने कभी अपने घरवालों से बात नहीं की.
वो अपने भाई और पिता की शक़्ल भी नहीं देखना चाहती. उसे लगता है कि वह किन्नर है तो उसे पिता की संपत्ति में भी उसका कोई अधिकार नहीं बचा. पिता के बाद निशा के बड़े भाई को दोनों का हिस्सा मिलेगा.
मेरे घर में भी ज़्यादातर लोग मुझसे बात करने से बचते हैं. हमारे ज़्यादातर रिश्तेदारों ने कहा कि वो मुझसे तभी मिलेंगे, जब मैं निशा को छोड़ दूंगा. तो मैंने रिश्तेदारों को ही छोड़ दिया.

लड़कियों के प्रस्ताव

हालांकि, बीते दो सालों में परिवार के लोगों ने ये दबाव बढ़ाया है कि मैं किसी लड़की से शादी कर लूं. उन्हें ये लगता रहता है कि मेरी राय बदलेगी.
वो शादी के लिए तीन लड़कियों के प्रस्ताव ला चुके हैं. लेकिन मेरी शर्त थी कि मैं शादी के बाद भी निशा का साथ नहीं छोडूंगा. ये बात मैं उन्हें टहलाने के लिए कह देता हूँ.
वहीं शादी की बात भी होती है तो निशा का डर बढ़ने लगता है, कि कहीं मैं उसे छोड़कर न चला जाऊं.
इसी डर में वो मुझे फ़ेसबुक और व्हॉट्सऐप इस्तेमाल करने से रोकती है. ताकि किसी और लड़की के चक्कर में न पड़ जाऊं. मैं इस बात पर बड़ा हंसता हूँ.

दो आख़िरी ख़्वाहिशें

मेरी माँ अपने अंतिम दिनों में कहा करती थी, "बेटा मत पड़ इन चक्करों में. जवानी के साथ सब चला जायेगा. घर महिला से ही चलता है. तू सबसे छोटा है. मेरे मरने के बाद तुझे कोई नहीं पूछेगा."
अब उसकी बात सही लगने लगी है. हालांकि उस वक़्त मैंने उन्हें कहा था, "माँ ये दिल की लगी है, नहीं छूट रही..."
माँ के जाने के बाद घर में किसी ने मुझसे सीधे मुँह बात नहीं की. वो ये कहकर मुझे डराते ज़रूर हैं कि जैसे-जैसे बुढ़ापा आयेगा, जीवन मुश्किल होता जायेगा.
मैं प्यार करता हूँ निशा से. सच्चा प्यार. मैं इसके साथ ही पूरी लाइफ़ बिता दूंगा. मुझे इससे मतलब नहीं है कि ये लड़का है, लड़की है या किन्नर. मेरा इससे दिल मिलता है. बस यही है.
मेरी बस दो ख़्वाहिशें हैं. एक, इस कमरे से थोड़ा बड़ा घर खरीदना है जहाँ हम तरीक़े से रह सकें.
और दूसरा, एक बच्चे को गोद लेकर उसकी शादी करनी है. मैं अपनी शादी में कुछ ख़र्च नहीं कर पाया. बारात भी नहीं देखी और दावत भी नहीं कर पाया था.
हालांकि निशा किसी बच्चे को गोद लेने के ख़याल से डरती है. उसे लगता है कि किसी बच्चे को अपने जीवन में लाना आसान नहीं होगा.
ये
पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की दो अलग-अलग सभाओं (राजस्थान के जयपुर और छत्तीसगढ़ के भिलाई) में पुरुषों ही नहीं महिलाओं की काले रंग की चुन्नियां और अंतर्वस्त्रों जांच करने की ख़बर सामने आई है.
यह एक अश्लीलता तो है ही और आम नागरिकों के सम्मान पर आक्रमण से कम नहीं है.
पर ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. बीते जुलाई और अगस्त में इलाहाबाद और पुणे में अमित शाह की रैलियों में भी काले कपड़े प्रतिबंधित किए गए.
एक तरह से प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों के दौरान काले रंग पर 2016 से ही अघोषित पाबंदी है और अब जब पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा हो चुकी है, इन दोनों नेताओं की जनसभाओं की संख्या बढ़ेगी और इसी के साथ काले कपड़ों को लेकर ये सख्ती बढ़ने की गुंजाइश है.
मोदी-शाह के ख़िलाफ़ विपक्षी दलों-संगठनों द्वारा काले झंडे दिखाए जाने की घटनाएं अभी छिटपुट ही हुई हैं, लेकिन जैसे-जैसे आर्थिक-सामाजिक मोर्चों पर सरकार को लेकर लोगों में नाराज़गी दिख रही है, वैसे-वैसे प्रशासनिक चौकसी भी बढ़ रही है.
कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री को राजस्थान में और फिर तमिलनाडु में द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम द्वारा कावेरी जल-विवाद पर सरकार की टालमटोल के ख़िलाफ़ काले झंडे दिखाए गए.
उत्तर प्रदेश में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जन-असंतोष बढ़ रहा है और लखनऊ की एक छात्रा पूजा शुक्ला को जून में योगी के सामने काला झंडा दिखाने के लिए पच्चीस दिन तक जेल में रहना पड़ा.
जुलाई 2018 में जब नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश गए तो पुलिस ने पूजा शुक्ला को गड़बड़ी फैलाने की आशंका में पहले ही पकड़ लिया.जस्थान में जब मोदी की सभा में काले कपड़े ही नहीं बल्कि काली पगड़ियां पहने हुए सिख श्रोताओं को भी परेशानी उठानी पड़ी तो प्रदेश के कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा, "कांग्रेस की जनसभाओं में किसी भी रंग पर पाबंदी नहीं है. काला, पीला, हरा, नीला, लाल, नारंगी, सभी रंगों का स्वागत है."
एक सभा में राहुल गांधी भी शायद भाजपा को जवाब देने के लिए ही कह चुके हैं कि "अगर मेरी सभाओं में कुछ लोग काले झंडे दिखाते हैं तो यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है. मैं उनका स्वागत करूँगा."

Monday, October 8, 2018

巴黎气候协议在资金问题上仍存分歧

巴黎气候峰会因为两个紧密相关的问题进入加时,即对抗全球变暖谁应该承担多少资金, 以及国际社会该如何划分富裕、贫穷与其他国家。

巴黎协定的第二稿显示,来自近200个国家的观察员和数以千计的观察者认为这些棘手问题可能无法在公开辩论中解决。负责此次联合国气候变化峰会的法国外长法比尤斯 宣布,周五的所有时间将展开非正式讨论 - 双边形式或小集团形式。他希望周六上午的第三次草案可以准备就绪并且通过。

资深的气候大会观察家认为,这是目前唯一可行的方法了,但他们也指出,这样做有一定风险。有些国家可能在非正式谈判中被冷落,迫使他们在的最后一次全体会议时才来表达自己的意愿,这将会对协议造成一定的障碍。

在此之前是一段艰苦的闭门谈判。拒信, 周五晚上似乎还有两大问题并未解决 - 新兴经济国表示只要富裕国家遵守该协议具有法律约束的部分,承诺到2020年,每年募集1000亿美金的款项,才肯 接受“动态差异化”。

一个相关的问题也未解决 - 美国有意将“共同但有区别的责任” ( ), 从巴黎协议中删除,将它换成“动态差异化”。这将意味着发展中国家的经济一旦越过某个点 - 如中国和印度 - 也将承担与工业化国家类似的责任。美国希望借此控制碳排放进而遏止全球变暖 。

与此同时,由中国引导,印度支持的发展中国家反对去除CBDR这一条款。中国外交部副部长、中国代表团第一副团长刘振民表示,他希望看到CBDR “明确规定,并反映在所有支柱议题上” 。印度环境部长普普拉卡什•贾瓦德卡尔形容,这是一条无法逾越的“红线”。

而另一方面,据报导美国国务卿克里向中国和印度代表表示,含有该条款的巴黎协定将在美国国会遭到挑战。美国总统奥巴马就此问题致电中国国家主席习近平,一天前他与印度总理莫迪在电话中也就这一问题进行了长时间的交谈。在巴黎的各国与会代表和观察员都等待着最后的解决方案。

科学家发出警告,企业界表示欢迎

与此同时,科学家在研究了协议草案后警告称,大部分的条文与全球平均温升控制在1.5℃或2℃内的目标不一致。 该草案提到“碳中立”将在本世纪下半叶实现。奥斯陆国际气候和环境研究中心研究部主管斯蒂芬·卡尔贝肯则表示:“如果我们的目标是1.5℃ ,到2020年我们可能会耗尽所有的碳(排放量)预算。 ”

英国曼彻斯特大学廷德尔中心的凯文·安德森说,该草案是“只适用于北半球较富裕的群体,但对于其他弱势群体来说是危险和致命的,” 他还指出,“全球10%的人口产生了全球一半的温室气体排放量”。

但该草案受到企业界和产业团体中受到欢迎。s 绿色商业组织的爱德华·卡梅隆表示: “如果国家采用这一草案,私营部门将做为业务伙伴的来实现草案中的规划。 ” 格兰瑟姆气候变化与环境研究所的尼古拉斯·斯特恩认为,“清晰的信号是非常好,该草案清楚地表明,低碳经济将可以创收盈利,而高碳经济将会带来金融风险。

环保团体的意分歧

关注谈判多年的环保团体对于草案的意见迥异。世界自然基金会和绿色和平对于将平均气温上升到1.5℃的极限 ,而不是2℃的想法表示欢迎。他们对于审查和加速国家减排行动的提案表示欢迎。

但据新德里智库基金会的希納斯瓦米指出,富裕国家甚至没有提到从现在开始 到2020年,即巴黎协议生效的年份,他们会采取什么行动。 行动援助组织的哈吉特•辛格感叹,赔偿和追究因气候变化造成的损失与责任等问题已经在草案中被删除。

新德里科学与环境智库中心的苏尼塔·纳拉因觉得此草案极不公正。她说,以美国为首的富裕国家用尽了他们的“碳预算”,现在则限制贫困国家的“发展空间” 。

Tuesday, October 2, 2018

केंद्रीय राज्य मंत्री जीएस शेखावत ने कहा, गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने किसान नेताओं से

बिना शर्त कर्ज माफी, गन्ना मिलों का बकाया भुगतान करना, फसलों का अधिकतम मूल्य दिया जाना, खेतों के लिए मुफ्त बिजली और डीजल के दामों में कटौती की मांगों को लेकर हजारों किसानों ने मंगलवार को दिल्ली की ओर कूच किया और राष्ट्रीय राजधानी की ओर जाने वाली प्रमुख सड़कों पर यातायात बाधित किया. राष्ट्रीय राजधानी की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोंडा, बस्ती और गोरखपुर जैसे दूर-दराज की जगहों के साथ-साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना क्षेत्र से आये किसानों की भीड़ नजर आ रही थी. उत्तर-प्रदेश से लगने वाली सीमा पर स्थित पुलिस चौकियों में धारा 144 (निषेधाज्ञा) लागू होने के कारण पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने, किसी तरह की सार्वजनिक बैठक आयोजित करने

, एम्प्लीफायर, लाउडस्पीकर और इसी तरह के किसी अन्य उपकरणों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गयी है. हरिद्वार में टिकैत घाट से 23 सितंबर को शुरू हुई किसान क्रांति यात्रा में उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से किसान शामिल होते गये. ये लोग पैदल, बसों में या फिर ट्रैक्टर ट्रॉलियों में सवार होकर आए हैं. इन लोगों के हाथों में भारतीय किसान यूनियन के बैनर हैं. इस यूनियन ने अपनी मांगों पर दबाव बनाने के लिए मार्च का आह्वान किया है.  मेरठ से आये एक किसान हरमिक सिंह ने कहा, ‘हम सरकार से कोई भीख नहीं मांग रहे हैं. हम अपना अधिकार मांग रहे हैं.’    उन्होंने बताया कि किसान बिजली की ऊंची दरों और आसमान छूती ईंधन की कीमतों के कारण संकट में हैं. उन्होंने कहा, ‘आपको 500 रूपये का गैस ठीक लगता है क्या?’ एक अन्य किसान ने दावा किया कि तीन लाख से अधिक किसान राजघाट की ओर मार्च कर रहे हैं
किसानों को समर्थन देने के लिए  प्रमुख चौधरी अजित सिंह यूपी गेट पहुंचे 
- केंद्रीय राज्य मंत्री जीएस शेखावत ने कहा कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने किसान नेताओं से बात की है, कई मुद्दों पर सहमति बनी. उन्‍होंने कहा कि यूपी के मंत्री लक्ष्मी नारायण, सुरेश राणा किसानों से मिलने के लिए जा सकते हैं. - जेडीयू नेता के सी त्‍यागी ने कहा कि किसान शांतिपूर्वक राजघाट की तरु जा रहे थे लेकिन उनके साथ बुरा बर्ताव किया गया. उन पर लाठी चार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए. हम इसकी निंदा करते हैं.  - भारतीय किसान यूनियन के अध्‍यक्ष राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों पर पुलिस का एक्‍शन गलत है. हमारे नेता गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर रहे है और उसके बाद हम तय करेंगे कि क्‍या करना है. कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र शेखावत, यूपी के गन्ना मंत्री सुरेश राणा और मंत्री लक्ष्मी नारायण प्रदर्शनकारियों से मिलने आ सकते हैं

- भारतीय किसान यूनियन के मुताबिक, किसानों के प्रतिनिधिमंडल की इस समय केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ मुलाकात चल रही है

- किसानों को समर्थन देने  प्रमुख चौ. अजीत सिंह लगभग 1:30 तक गाज़ीपुर बार्डर पहुंचेंगे

- दिल्ली पुलिस का किसानों को प्रस्ताव कि अगर अगर किसान शांतिपूर्ण तरीके से किसान घाट तक जाने को सहमत हो तो दिल्ली पुलिस खुद अपनी 25 बसों में बैठाकर किसानों को किसान घाट ले जाने को तैयार

- अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार किसानों से किए वादे करने में नाकाम रही, जाहिर वे विरोध करेंगे, हम किसानों के साथ हैं

- भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि हमें यहां क्यों रोक दिया गया है (यूपी-दिल्ली सीमा पर)? रैली एक अनुशासित तरीके से आगे बढ़ रही थी. अगर हम अपनी सरकार को हमारी समस्याओं के बारे में नहीं बता सकते तो हम किससे कहेंगे? क्या हम पाकिस्तान या बांग्लादेश जाए?

टिप्पणियां
  - दिल्ली आ रहे हज़ारों किसानों को यूपी गेट पर रोक दिया गया है. गाज़ीपुर और महाराजपुर बॉर्डर को सील कर दिया गया है. भारी तादाद में पुलिस की तैनाती की गई है.

Monday, September 10, 2018

विपक्ष बंद के बहाने ख़ौफ़ का माहौल बना रहा है: रविशंकर प्रसाद

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के भारत बंद के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी ने कड़े शब्दों में निंदा की है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इससे पहले नरेंद्र मोदी सरकार पर पेट्रोल और डीज़ल के दाम को लेकर जो आरोप लगाए थे, बीजेपी ने उसका जवाब दिया है.
बीजपी नेता और देश के क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि विपक्ष का भारत बंद असफल रहा है.
उन्होंने बिहार में बंद के कारण एंबुलेंस न पहुंच पाने से एक दो साल की बच्ची की मौत का ज़िक्र करते हुए विपक्ष के इस क़दम की निंदा की.
उन्होंने कहा कि जनता को आज कोई परेशानी नहीं, इसीलिए जनता इस बंद के साथ नहीं खड़ी है. इसी वजह से कांग्रेस और विपक्ष के लोग खीझ कर खौफ़ का माहौल बना रहे हैं
उन्होंने कहा कि हिंसा और मौत का खेल बंद होना चाहिए. 'जब जनता का समर्थन नहीं मिलता तो उग्रता का प्रदर्शन को बंद को सफल बनाने की कोशिश की जा रही है.'
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 'डीज़ल-पेट्रोल की कीमत का बढ़ना हमारे हाथ से बाहर है क्योंकि तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन को सीमित कर रखा है. वेनेजु़एला में राजनीतिक अस्थिरता है, ईरान अमरीकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और अमरीका में शेल गैस का उत्पादन नहीं हो रहा है. दुनिया में तेल की मांग और पूर्ति का अनुपात गड़बड़ है. इस वजह से तेल की कीमतें बढ़ी हुई हैं. इस पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं है.'
उन्होंने यूपीए के दौर का ज़िक्र करते हुए कहा कि उस समय 39 रुपये से 73 रुपये पर पहुंच गया था पेट्रोल क्योंकि ये ऐसी समस्या है जिसका हल सरकार के पास नहीं. ये अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है.
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 'हमारी सरकार ने मुद्रास्फीति को कम करने की कोशिश की और कामयाबी भी मिली है. यूपीए के समय 10.4 थी महंगाई दर जबकि हमारे शासन काल में यह 4.7 हो गई है.'
इससे पहले पेट्रोल औ डीज़ल के बढ़ते दाम के ख़िलाफ़ विपक्ष के भारत बंद के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार एक धर्म को दूसरे से, एक जाति को दूसरी जाति से लड़ाने का काम कर रही है.
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी कांग्रेस के 70 सालों में विकास न होने की बात करते हैं. लेकिन असलियत यह है कि पिछले 70 साल में रुपया इतना कमज़ोर नहीं रहा जितना मोदी शासन के चार सालों में हो गया है.
राहुल गांधी ने कहा कि पेट्रोल 80 रुपये के पार चला गया है और डीज़ल 80 से थोड़ा ही कम है, लेकिन नरेंद्र मोदी पूरा देश घूमते हैं पर इसके बारे में एक शब्द भी नहीं कहते.
राहुल गांधी ने गैस सिलेंडर के दाम की बात भी की और कहा कि यूपीए के समय 400 रुपये का सिलेंडर अब 800 रुपये में बेचा जा रहा है.
उन्होंने बलात्कार और हत्याओं का मुद्दा भी उठाया और कहा कि पीएम मोदी इस पर भी कुछ नहीं कहते.
इसके अलावा राहुल गांधी ने काला धन, नोटबंदी, जीएसटी का मुद्दा उठाकर पहले की तरह ही केंद्र की सरकार पर निशाना साधा.
उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में केवल 15-20 क्रोनी कैपिटलिस्ट को रास्ता नज़र आता है, आम लोगों को नहीं क्योंकि सरकार की नज़र केवल उन्हीम 15-20 लोगों पर है.
भाषण के आखिर में उन्होंने कहा कि 'सभी विपक्षी दल एक साथ बैठे हैं ये ख़ुशी की बात है. हम एक साथ मिलकर बीजेपी को हराने जा रहे हैं.'
पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों के ​विरोध में कांग्रेस ने भारत बंद की जो कॉल दी है उसका कई राज्यों में असर दिखाई पड़ रहा है. इस बंद में कांग्रेस के साथ कुछ अन्य विपक्षी दल भी हिस्सा ले रहे हैं.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के राजघाट से बंद की शुरूआत की. राजघाट पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी पहुंचे और विपक्ष से एकजुट रहने की अपील की.
कांग्रेस का दावा है कि समाजवादी पार्टी, बसपा, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और राजद समेत 21 दल इस भारत बंद का समर्थन कर रहे हैं.
पिछले कुछ समय से पेट्रोल और डीज़ल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. रविवार को पेट्रोल के दाम में 12 पैसे प्रति लीटर और डीज़ल के दाम में 10 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई.
कुछ राज्यों में पेट्रोल के दाम 80 रुपये को पार गए हैं जो अब तक की सबसे ज़्यादा क़ीमत है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 80.50 रुपये और डीज़ल की कीमत 72.60 रुपये प्रति लीटर हो गई है. बिहार में पेट्रोल के दाम इससे भी ज़्यादा हो गए हैं.
जम्मू में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तेल के बढ़ते दामों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. हालांकि वहां सभी शैक्षणिक संस्थान खुले हैं.
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बंद का व्यापक असर देखने को मिला है. स्कूल-कालेज, परिवहन और व्यापारिक प्रतिष्ठान पूरी तरह से ठप्प होने की खबरें हैं.
मुंबई में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं ने घाटकोपर-अंधेरी मेट्रो लाइन ब्लॉक कर दी थी, लेकिन बाद में मुंबई मेट्रो के ट्वीटर हैंडल से ख़बर आई कि मेट्रो सेवा शुरू हो गई है.
वहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अंधेरी स्टेशन पर रेलने लाइन ब्लॉक की. महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख अशोक चौहान ने ही सुबह रेल रोको विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की थी.
ईस्ट कोस्ट रेलवे ज़ोन को 12 ट्रेन कैंसिल करनी पड़ी हैं जिसमें भुवनेश्वर-हावड़ा जन शताब्दी भी शामिल है.

Friday, September 7, 2018

新英国燃煤发电厂“必须封存二氧化碳”

据英国《卫报》报道,英国政府宣布将不再兴建新的燃煤发电厂,除非能马上捕捉和封存至少25%的温室气体,且到2025年能达到100%. 气候变化秘书长--艾德•米利班德的该项宣言被认为是对政府能源政策的改写及环保团体的胜利。

政府将在英国东部海岸规划兴建四个“能源产区",预计总产能将达到2500兆瓦。每个能源产区将至少包括一个新燃煤发电厂,它能捕捉碳排放并将其传送至填埋剩余油或气田的海域。

这座新型发电厂是30多年来首次兴建的发电厂,预计要到2015年才能投入运行。它们将分别坐落于伦敦东部的泰晤士河口、苏格兰北部的亨伯河、蒂斯河和起福斯河湾, 第五个可能是在英格兰西北部的马其赛特郡。政府设想将石油和煤炭公司联合起来,到2025年减少高达60%的因燃煤发电产生的废气排放。

若想要在所有的新火力电厂进行碳捕捉和储存,每个电厂将会花费大约14.6亿美元的资金。政府和能源公司就筹措资金问题进行会谈,他们商讨希望能通过对所有英国矿物燃料发电厂征税获得这笔资金。

米利班德称英国欲在洁净煤技术上取得全球领导地位。随着许多国家为了抵抗全球变暖而承诺要减少碳排放,这项技术被认为将会成为在未来五十年的一个全球性产业。煤然是最脏的矿物燃料,但却提供了至少1/3的全球电力。
澳大利亚海洋科学家说,他们对于澳大利亚大堡礁海洋公园里的珊瑚礁从2006年发生的严重珊瑚白化现象中恢复过来表示惊讶。澳洲研究委员会珊瑚礁研究高级中心和昆士兰大学海洋研究中心的吉列尔莫•迪亚斯•普利认为,恢复要归功于难得的多种因素的综合作用。

首先是幸存珊瑚组织碎片的快速再生”, 迪亚兹·普利多说, “其次是罕见的海藻的季节性顶梢枯死,第三则是珊瑚物种的高度竞争性。因而使得珊瑚能摆脱海藻。”

“但是这一切都发生在拥有良好的海洋保护区和较好的水质的前提下,” 迪亚兹·普利指出, “最近一二十年,我们很少见到珊瑚礁从大规模珊瑚白化现象或其他人类活动影响下恢复的例子。 ”

2006年,在大堡礁南部的吉宝群岛,高温的海水造成大量珊瑚严重白化,损坏的珊瑚礁迅速被某一品种海藻闭塞至死,这可能会导致珊瑚物种的全面消亡。

迪亚兹·普利和九个同事将这项研究发表在《公共科学图书馆·综合》 杂志上。研究解释了影响珊瑚礁的因素——比如过度捕捞和水质下降。他们提到,对于气候变化下的珊瑚礁管理工作,各种生态机制的应变恢复能力才是至关重要的。

Tuesday, September 4, 2018

电动车市场看好中国消费者

日前,韩国现代集团宣布与北汽集团合资生产面向中国市场的电动车辆。此举意味着现代集团成为又一家试图抢占这一世界最大汽车市场份额的外国公司。然而,即使在各种补贴,优惠政策之下,2010年惨淡的销售额表明中国消费者对电动车的接受尚需时日。

比亚迪可以说是中国电动车电池行业的领导者。它的e6型号轿车已经被深圳市政府用作出租车。同时赫兹还提供这些车的租赁服务。比亚迪还研发了一款电动公共汽车,eBUS-12。目前该电动公共汽车在深圳和长沙运营。

然而,来自合资企业的竞争不容小觑。在国产电动车暴露出安全问题的情况下,外资厂商引进的被认为更加可靠的技术会成为消费者选择车辆的一个重要因素。尼桑和东风合资创立了一个面向中国市场的新品牌-Venucia启辰,据传其中有一款电动车型。尼桑的Leaf 聆风系列电动车在欧美市场有着不错的口碑。

宝马与华晨中国汽车控股的合资企业华晨宝马汽车,也推出了一款插电式混合动力车样车 - 欲尝试进军中国豪华品牌汽车市场。他们计划于2013年启动中国市场。

中国市场上的其他公司包括沃尔沃(由浙江吉利控股集团所有),也打算生产电动汽车和混合动力车。在中国最畅销的汽车制造商大众公司,也宣布推出两款电动车,包括朗逸,以及途锐的混合动力电动汽车。通用汽车和上海汽车工业公司(SAIC)的合资公司上海通用汽车,还打算到2011年底为中国市场开发雪佛兰Volt,该车型是一个插电式混合动力电动汽车。

这些产品若想在中国取得成功,将不得不改变中国消费者的态度。许多CEO们,包括尼桑的Carlos Gohn,对中国持有信心,坚信在未来几年内中国将成为电动汽车的一个主要市场。来自埃森哲,德勤和派克的报告加强了这种信念,中国或将成为电动汽车取代传统燃油汽车的领军市场。

本文作者:保罗•卡斯腾,中外对话伦敦实习生。翻译:张耀润,中外对话伦敦实习生。
日前,韩国现代集团宣布与北汽集团合资生产面向中国市场的电动车辆。此举意味着现代集团成为又一家试图抢占这一世界最大汽车市场份额的外国公司。然而,即使在各种补贴,优惠政策之下,2010年惨淡的销售额表明中国消费者对电动车的接受尚需时日。

比亚迪可以说是中国电动车电池行业的领导者。它的e6型号轿车已经被深圳市政府用作出租车。同时赫兹还提供这些车的租赁服务。比亚迪还研发了一款电动公共汽车,eBUS-12。目前该电动公共汽车在深圳和长沙运营。

然而,来自合资企业的竞争不容小觑。在国产电动车暴露出安全问题的情况下,外资厂商引进的被认为更加可靠的技术会成为消费者选择车辆的一个重要因素。尼桑和东风合资创立了一个面向中国市场的新品牌-Venucia启辰,据传其中有一款电动车型。尼桑的Leaf 聆风系列电动车在欧美市场有着不错的口碑。

宝马与华晨中国汽车控股的合资企业华晨宝马汽车,也推出了一款插电式混合动力车样车 - 欲尝试进军中国豪华品牌汽车市场。他们计划于2013年启动中国市场。

中国市场上的其他公司包括沃尔沃(由浙江吉利控股集团所有),也打算生产电动汽车和混合动力车。在中国最畅销的汽车制造商大众公司,也宣布推出两款电动车,包括朗逸,以及途锐的混合动力电动汽车。通用汽车和上海汽车工业公司(SAIC)的合资公司上海通用汽车,还打算到2011年底为中国市场开发雪佛兰Volt,该车型是一个插电式混合动力电动汽车。

这些产品若想在中国取得成功,将不得不改变中国消费者的态度。许多CEO们,包括尼桑的Carlos Gohn,对中国持有信心,坚信在未来几年内中国将成为电动汽车的一个主要市场。来自埃森哲,德勤和派克的报告加强了这种信念,中国或将成为电动汽车取代传统燃油汽车的领军市场。

本文作者:保罗•卡斯腾,中外对话伦敦实习生。翻译:张耀润,中外对话伦敦实习生。

Friday, August 31, 2018

बच्ची बोली- पेट में दर्द होता है, टेस्ट हुआ तो डॉक्टर के उड़ गए होश

मध्य प्रदेश में गैंगरेप की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है. यहां भोपाल रेलवे स्टेशन के पास एक जर्जर मकान में एक 12 साल की बच्ची के साथ 4 लोगों ने गैंगरेप किया. बताया जा रहा है कि घटना 3 नवंबर की है. उस वक्त जब जीआरपी को इसकी खबर मिली थी तो उन्होंने पल्ला झाड़ लिया.
इसके बाद जब मीडिया में यह खबर आई तो जीआरपी ने आनन-फानन में मामला दर्ज किया. जब मंगलवार को पीड़ित बच्ची का मेडिकल टेस्ट कराया गया तो पुलिस और डॉक्टर के होश उड़ गए. टेस्ट में बच्ची को 4 माह का गर्भ होने की बात सामने आई. फिलहाल उसे भोपाल के सुल्तानिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
दैनिक भास्कर के मुताबिक, बच्ची अपने भाई को ढूंढते हुए जबलपुर से भोपाल आ गई थी. भाई को खोजने के लिए वह रेलवे स्टेशन पर ही सोती थी. इस बीच बच्ची पर कुछ दरिंदों की नजर पड़ी.
वह उसे चॉकलेट देने के बहाने सुनसान जगह ले जाते थे और वहां गैंगरेप करते. बच्ची ने जीआरपी को बताया कि उसे अक्सर पेट में दर्द होता था. उसे समझ नहीं आता था कि दर्द क्यों हो रहा है. जब भी दर्द होता तो वह कुछ खा लेती थी.
इसके पहले भी उसके साथ दरिंदगी होने की बात जब बच्ची से पूछी गई तो वह चुप हो गई और फूट-फूटकर रोने लगी. फिलहाल पुलिस गैंगरेप के आरोपियों की तलाश कर रही है.
बता दें कि कुछ दिन पहले कोचिंग से लौट रही एक छात्रा के साथ भोपाल के हबीबगंज स्टेशन के पास गैंगरेप हुआ था. इस घटना के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस समेत रेलवे पुलिस के लगभग 10 अफसरों को सस्पेंड किया गया था. उस वक्त भी पुलिस की संवेदनहीनता नजर आई थी और मामला दर्ज नहीं किया था. इस घटना के खिलाफ भोपाल में हजारों लोग सड़कों पर उतरे थे और पुलिस प्रशासन से दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की थी. में निधन हुआ. मेरे लिए शर्मिंदगी की बात यह है कि मुझे उनकी मौत से कुछ समय पहले ही उनके बारे में कई अहम जानकारियां मिल सकीं और अब मैं उनपर लिख भी रहा हूं. कबूतरी के इस गीत को दुनिया भर में फैले उत्तराखंड के प्रवासियों के अलावा नेपाल में भी खूब प्यार मिला.
इस गीत में कुछ शब्द नेपाल से भी आए हैं और इस लिहाज से यह गीत पुराने समय में भारत और नेपाल की साझा संस्कृति का प्रतीक भी है. इसके अलावा, इस गीत में हमें दोनों देशों को बांटने वाली महाकाली नदी और दूसरे प्राकृतिक बिंब और वहां की सामाजिक स्थितियों का रूपण भी देखने को मिलता है.
साज बजाने हाथों से तोड़े पत्थर
उत्तराखंड की मिरासी (दलित) जाति से आने वालीं कबूतरी का जीवन संघर्ष उत्तराखंड की आम महिलाओं जैसा ही दूभर रहा, बल्कि एक बंद समाज और शिल्पकार (दलित) जाति में पैदा होने की वजह से यह उस स्तर तक कष्टप्रद रहा कि इसे महसूस करना अधिकतर के लिए बहुत मुश्किल होगा. कबूतरी जिन हाथों से साज बजाती थीं, उन्हीं हाथों से पत्थर भी तोड़ती थीं.
उत्तराखंड के दलितों की आजीविका का पारंपरिक साधन खेतिहर मजदूरी, पत्थर तोड़ना, भवन निर्माण, कृषि यंत्र और औजार बनाना और ऋतुओं के त्योहारों, शादियों और दूसरे उत्सवों में नृत्य और गायन रहा है. कबूतरी ने भी अपने माता-पिता और नानी से सात साल की उम्र से ही गायन सीख लिया था. कम उम्र में ही उनकी शादी दीवानी राम से हो गई, जो उनके लिए गीत लिखते थे और वह विभिन्न मंचों पर उन्हें गाती थीं. वही उन्हें आकाशवाणी तक भी ले गए.
आकाशवाणी ने दी पहचान
कबूतरी ने 1970 और 80 के दशक में आकाशवाणी नजीबाबाद, रामपुर, लखनऊ और मुंबई के विभिन्न भाषा के कार्यक्रमों में गायन किया. लखनऊ दूरदर्शन केंद्र से भी उनके गायन का प्रसारण हुआ. उनकी दर्जन भर से ज्यादा रिकॉर्डिंग ऑल इंडिया रेडियो के पास हैं. इसके अलावा उन्होंने क्षेत्रीय त्योहारों, रामलीलाओं, उत्तरायणी पर्वों जैसे कई मंचों पर भी गायन किया, जिसे शायद ही संरक्षित किया गया हो. पति की मृत्यु के बाद उन्होंने सामाजिक जीवन से दूरी बना ली और वह उत्तराखंड के सीमांत जिले- पिथौरागढ़ के अपने घर में रहकर मजदूरी करके अपने परिवार को पालने लगीं.
2002 में पिथौरागढ़ के छलिया महोत्सव में नवोदय पर्वतीय कला मंच उन्हें फिर से लोगों के सामने लाया और 2004 में उन्हें उत्तरा पत्रिका की संपादिका डॉ. उमा भट्ट, युगमंच, पहाड़ और नैनीताल समाचार के प्रयासों से नैनीताल में फिर से रीलॉन्च किया गया. यहां से कबूतरी का दूसरा दौर शुरू हुआ. संस्कृतिकर्मी और नाटककार जहूर आलम बताते हैं कि इस सफल कार्यक्रम को मीडिया ने भी खूब कवरेज दी और इसके बाद उन्हें देश भर से गायन के लिए बुलाया जाने लगा. डॉ. उमा भट्ट के प्रयासों से कबूतरी देवी पर एक डॉक्यूमेंटरी भी तैयार हो चुकी है. इसे कबूतरी देवी के सामने ही लोकार्पित करना था कि उनका असमय निधन हो गया.
बेगम अख्तर, तीजनबाई और कबूतरी
बुलंद आवाज की मलिका कबूतरी देवी ने संगीत की औपचारिक दीक्षा नहीं ली. जहूर आलम बताते हैं कि वह ऋतुरैण (मौसम के गीत), चौती, न्योली, छपेली, धुस्का के साथ ही अपने अंदाज में गीत, गजल और ठुमरी भी गाती थीं. उन्हें उत्तराखंड की तीजनबाई या पहाड़ की बेगम अख्तर भी कहा जाता है. उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, लोककलाओं का अध्ययन करने वाले डॉ. गिरिजा पांडे के मुताबिक कबूतरी ने अपने श्रोताओं के लिए कई बार बेगम अख्तर को भी गाया है. बेगम अख्तर और कबूतरी दोनों को बुलंद गले की गायिकाओं के तौर पर जाना जाता है. संस्कृतिकर्मी और नाटककार जहूर आलम कहते हैं कि कबूतरी देवी की बुलंद आवाज और खनकदार गले के साथ ही उनकी खरजदार आवाज एक हद तक बेगम अख्तर की गायिकी की याद दिलाती थी.
हालांकि, उत्तराखंड के रंगकर्मी और संस्कृति के अध्येता इस तुलना से सहमत नहीं दिखते. इसकी एक वजह तो यह हो सकती है कि तीजन ने पांडववाणी (महाभारत की कथा) गाई है, जबकि कबूतरी के गायन में अधिकांश प्रकृति, विरह (नियोली) और प्रेम के गीत हैं और दैवीय गीत यदाकदा ही आए हैं. संस्कृति और मीडिया के अध्येता डॉ. भूपेन सिंह कहते हैं कि जिस तरह तीजन बाई को छत्तीसगढ़ की कबूतरी देवी नहीं कहा जा सकता, उसी तरह कबूतरी को उत्तराखंड की तीजनबाई कहना सही नहीं है, मीडिया को ऐसी तुलनाओं से बचना चाहिए. वह कहते हैं कि दोनों गायिकाओं के परिवेश, सामाजिक परिस्थितियां और भूभाग भिन्न रहे, इसलिए उन्हें इन्हीं संदर्भों के साथ देखा जाना चाहिए.
हां, अनिल कार्की कबूतरी को प्रचलित मान्यताओं को तोड़ने के संदर्भ में बेगम अख्तर कहने के हामी हैं, हालांकि बाद में गजल गायिकी के शास्त्रीय गायन के ढांचे में आने से उन्हें बेगम अख्तर कहा जाना भी अनिल को सही नहीं लगता. इस तुलना को वह सरलीकरण कहते हैं. अनिल कहते हैं कि तीजन और बेगम ने लोक को शास्त्र में ढालने की कोशिश की, जो कि कबूतरी के गायन में नहीं मिलता. वह बताते हैं, कबूतरी के आकाशवाणी में गाने से कुमाऊंनी संगीत भी अकादमिक हुआ और यह मुक्त लोक से 5-6 मिनट की सीमाओं में बंध गया.
कबूतरी के गायन में पहाड़ की झलक
राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित कबूतरी ने गायन को अपना पूर्णकालिक पेशा नहीं बनाया, शायद इसलिए उन्हें इतना नाम नहीं मिला. उत्तराखंड के उभरते रंगकर्मी और साहित्यकार डॉ. अनिल कार्की बताते हैं कि उनसे एक बार कबूतरी देवी के गायन दल के ही वरिष्ठ सदस्य और उन्हें सिखाने वाले (दलित) लोकगायक भानुराम सुआकोटी ने कहा था कि वह कैसेट बेचने के लिए नहीं गाते हैं. समझा जा सकता है कि कबूतरी का गायन भी बाजार से प्रसिद्धि और कमाई करने की चाहत से परे था. अनिल बताते हैं कि कबूतरी बिना तामझाम, मंचीय आडंबर के कहीं भी, कभी भी गाने को तैयार रहती थीं.
कबूतरी हारमोनियम और हुड़के (हाथ से बजाया जाने वाला डमरू जैसा और छोटे ढोल के आकार का वाद्ययंत्र) के साथ गाती थीं. वह अपने पति के साथ कार्यक्रमों में हिस्सा लेने जाती थीं. तब पहाड़ों तक सड़कें नहीं पहुंची थीं और पैदल ही चला जाता था. इसी दौरान वह रास्ते में पति दीवानी राम के रचे गीतों को यादकर गायिकी का अभ्यास (रियाज) करती थीं. उनके गीतों में पलायन, विरह, मौसम, चिड़िया, पहाड़, नदी-नौले, जंगल, बैल-भैंस, रात-दिन, चांद-तारे, घास के मैदान और मंदिरों का जिक्र देखने को मिलता है.
कबूतरी देवी का संभावित आखिरी इंटरव्यू-

Thursday, August 30, 2018

劫匪惊天绑架想脱逃 记者猛追新闻踩红线

30年前,德国一场抢劫挟持案持续了56个小时,最终在高速公路上以暴力流血方式结束。尘埃落定,人们发现媒体在其中扮演的角色相当富争议,其中有一名记者的行为更被视为过线。
这一轰动一时的大劫案的犯罪人之一不久前刑满获释,让“格拉德贝克人质秀”重新回到公众视野。
警告:本文历史图片可能会令读者不安,慎入!
2018年2月,迪特尔·德格斯基(
之后,巴士离开了车站,向北部大城市汉堡方向开去。路上,车停在高速公路加油站,两名银行职员被释放了。罗斯纳尔的女友玛丽安·罗布利奇去上厕所。
在这里,一直对绑匪束手无策的警察们误判了形势,犯下一个致命的错误。他们在罗布利奇离开厕所时把她抓了。等德格斯基发现女朋友久去不回,给警察下了通牒:5分钟内把她送回来,否则要枪杀一名人质。
警察没能在5分钟内释放罗布利奇,德格斯基朝15岁的伊马纽尔·迪·吉沃奇(  ) 头部开了一枪。吉沃奇因失血过多死亡。
大巴车接着上路,在凌晨时分越过边境进入荷兰。
劫匪在荷兰放弃了大巴车,上了一辆由德国警方提供的宝马牌汽车。他们挟持了两名巴士上的乘客:18岁的茜克·比思柴夫(   )和她的朋友英内丝·沃尔特(  )。到了早晨7点,他们又开车回到了西德境内。
)在监狱服刑近30年后获释。他当年参与了一系列暴力犯罪活动,而在案发的前后3天时间里,整个过程经媒体密切跟踪报道,留下了非常详细的纪录。
在德国,此案被称为“格拉德贝克人质秀”。至今它仍然是人们集体记忆中的一道伤疤:因为案件中有两名年轻人质丧生;因为警方让事件扩大到失控的地步;还因为媒体贴身跟踪报道正在进行中的罪案,影响了警方的行动,痛失和平解决案件的良机。
案发时,乌多·罗贝尔( )39岁,是科隆小报《快报》的副总编。
他说:“这一案件当时对警方和媒体来说,都是从来没有出现过的新情况。如果发生在现在,每个记者都会稍稍停下来提醒自己:等等,这里应该有些红线是我万万不能踩的。”
“但是在当时,我们所有人都像着了魔一样,根本就不思考自己到底在干什么。”
当时,银行尚未开门营业,里面没有顾客。两人持枪威胁职员。几分钟后,警察赶到了,警匪之间出现对峙。
经过将近一天的谈判,警方答应提供一辆出逃的汽车和一些现金。两名劫匪消失在夜幕里,还带走了两名银行职员作为人质。
劫匪开着汽车乱转,还在某处停了一会,接上了罗斯纳尔的女友。
第二天下午,他们在距离格拉德贝克230公里的不来梅市郊停了车。
他们本想另租汽车继续出逃,但几次租车都没有成功,于是两人劫持了一辆载有30多名乘客的巴士。记者们蜂拥赶到汽车站,有的还上到巴士里拍照。罗斯纳尔在街头召开一场即兴记者会,手里握着枪。
数百万西德电视观众一直屏息观看事态的发展,整个过程仿佛就像电视剧,其中让人记忆最为深刻的的片段发生在不来梅:满是纹身的罗斯纳尔向围在他身边的媒体记者表示,他准备结束这一切,还把枪管塞进自己嘴里。
但有一个人却错过了如此令人震惊的新闻。
这个人就是记者乌多·罗贝尔:“我请了几天假,没有看电视也没有听广播,所以根本不知道外面发生了什么事情。那天早晨,他在网球俱乐部走进咖啡厅时才看到了电视上的新闻。
“我马上开车上班去了。我知道那天用不着担心缺头条新闻了。”
但他不知道的是,他很快将会成为这个新闻中的一部分。
罗贝尔到达办公室后,有同事马上传给他令人不安的消息:那辆宝马车,现在正停在科隆市中心步行购物区的外面。
罗贝尔跑下楼。果然,车就在街道中间。里面坐着5个疲惫不堪的人,看上去都要崩溃了。在驾驶座上的,是罗斯纳尔,手上握着枪;他旁边是玛丽安·罗布利奇;后座上是茜克·比斯柴夫和英内丝·沃尔特,她俩中间坐着德格斯基。他也手握一把枪。
数十个记者和路人把车团团围住。他们把麦克风和相机从车窗伸进车里。茜克被枪顶着脖子,回答了一个记者的提问,脸上还挤出一丝笑容。
德格斯基那些天一直靠啤酒和兴奋剂安非他命撑着,这时已经能看出酒精和药物的作用。他吹嘘自己杀了一个人。罗斯纳尔则反复念叨说他们绝不会缴械自首。
一个摄影师赶到现场,不慌不忙地架起一个梯子要找到好角度拍照。
当时有一段视频显示,一个电视记者准备采访时发现德格斯基的枪放在腿上。他问摄影师说:“我们是不是该让枪顶住她的头才好?”
所有的道德底线完全被抛在了脑后。
有个身影从人群后挤到了车前,似乎想跟绑匪们搭上某种关系。他30多岁,短头发,戴眼镜。他穿着黑色外套,袖子卷到胳膊肘上。他很激动,挥着胳膊,对围观者不满,将他们从车边推走。
他回忆说:罗斯纳尔和德格司机已经开始精神虚脱了,“我感觉当时的情况很危险。”
从现场视频来看,罗斯纳尔的确开始烦躁不安。他下了车,两手握着枪对着人群。
罗贝尔说:“接着他问我,到高速公路最快应该怎么走。他说‘我们现在就必须离开这里,我那个老友要顶不住发疯了。’”
罗贝尔开始解释怎么去高速公路,但是罗斯纳尔很烦躁,不想继续听下去。
“他说,要不你上车给我们带路。”
这下让罗贝尔傻眼了。
“那一刻,我必须马上做出决定。”他说
“当时局面越来越失控,而我有临危受命的感觉。但同时记者的本能也告诉我:我要追这条新闻。这个故事是我的。”
于是他挤进了后排座位,紧挨着茜克·比思柴夫坐下。车慢慢从人群里开了出来。
罗贝尔说:“我这么多年一直在想着那一刻。”
“我扪心自问,究竟我是从地狱来的记者,还是一个要缓解局面帮助那两个女孩的普通人。这个问题很难回答。但一旦我把这个责任担了起来,我觉得这两者兼而有之。我既是一个试图化解紧张局面的普通人,也是一个极度兴奋的记者,要抓住这个一生难得的最重要的新闻故事。”
上车后,罗贝尔试图与劫匪们说话。
“我以为警察肯定已经在车上装了窃听器,于是我想让他们说出点对警察有用的东西。但是德格斯基用枪指向我,要我闭嘴。我这才意识到,最好还是别说话。”