Monday, October 15, 2018

नज़रिया: क्या वाक़ई नरेंद्र मोदी और अमित शाह को काले रंग से डर लगता है?

वैसे निशा में लड़कों वाली ताक़त भी है. घर पर जब मज़ाक में हम दोनों में हाथापाई हो जाती है तो उसे हरा पाना आसान नहीं होता. कई बार तो वो मुझे ही गिरा देती है.
पहले मेरे बहुत दोस्त थे. लेकिन अब ज़्यादातर पीछे छूट गए हैं क्योंकि वो मुझसे किन्नरों से दोस्ती करवाने के लिए कहते थे.
उनका दिमाग सिर्फ़ सेक्स तक सीमित था. वो न तो किन्नरों को लेकर गंभीर थे और न ही मेरी सोच समझते थे.
निशा के समूह की मुखिया मुझे अपने दामाद की तरह इज्ज़त देती हैं.
निशा ने शादी से पहले घर छोड़ा था. इस बात को दस साल से ज़्यादा हो गए हैं. तब से लेकर आज तक उसने कभी अपने घरवालों से बात नहीं की.
वो अपने भाई और पिता की शक़्ल भी नहीं देखना चाहती. उसे लगता है कि वह किन्नर है तो उसे पिता की संपत्ति में भी उसका कोई अधिकार नहीं बचा. पिता के बाद निशा के बड़े भाई को दोनों का हिस्सा मिलेगा.
मेरे घर में भी ज़्यादातर लोग मुझसे बात करने से बचते हैं. हमारे ज़्यादातर रिश्तेदारों ने कहा कि वो मुझसे तभी मिलेंगे, जब मैं निशा को छोड़ दूंगा. तो मैंने रिश्तेदारों को ही छोड़ दिया.

लड़कियों के प्रस्ताव

हालांकि, बीते दो सालों में परिवार के लोगों ने ये दबाव बढ़ाया है कि मैं किसी लड़की से शादी कर लूं. उन्हें ये लगता रहता है कि मेरी राय बदलेगी.
वो शादी के लिए तीन लड़कियों के प्रस्ताव ला चुके हैं. लेकिन मेरी शर्त थी कि मैं शादी के बाद भी निशा का साथ नहीं छोडूंगा. ये बात मैं उन्हें टहलाने के लिए कह देता हूँ.
वहीं शादी की बात भी होती है तो निशा का डर बढ़ने लगता है, कि कहीं मैं उसे छोड़कर न चला जाऊं.
इसी डर में वो मुझे फ़ेसबुक और व्हॉट्सऐप इस्तेमाल करने से रोकती है. ताकि किसी और लड़की के चक्कर में न पड़ जाऊं. मैं इस बात पर बड़ा हंसता हूँ.

दो आख़िरी ख़्वाहिशें

मेरी माँ अपने अंतिम दिनों में कहा करती थी, "बेटा मत पड़ इन चक्करों में. जवानी के साथ सब चला जायेगा. घर महिला से ही चलता है. तू सबसे छोटा है. मेरे मरने के बाद तुझे कोई नहीं पूछेगा."
अब उसकी बात सही लगने लगी है. हालांकि उस वक़्त मैंने उन्हें कहा था, "माँ ये दिल की लगी है, नहीं छूट रही..."
माँ के जाने के बाद घर में किसी ने मुझसे सीधे मुँह बात नहीं की. वो ये कहकर मुझे डराते ज़रूर हैं कि जैसे-जैसे बुढ़ापा आयेगा, जीवन मुश्किल होता जायेगा.
मैं प्यार करता हूँ निशा से. सच्चा प्यार. मैं इसके साथ ही पूरी लाइफ़ बिता दूंगा. मुझे इससे मतलब नहीं है कि ये लड़का है, लड़की है या किन्नर. मेरा इससे दिल मिलता है. बस यही है.
मेरी बस दो ख़्वाहिशें हैं. एक, इस कमरे से थोड़ा बड़ा घर खरीदना है जहाँ हम तरीक़े से रह सकें.
और दूसरा, एक बच्चे को गोद लेकर उसकी शादी करनी है. मैं अपनी शादी में कुछ ख़र्च नहीं कर पाया. बारात भी नहीं देखी और दावत भी नहीं कर पाया था.
हालांकि निशा किसी बच्चे को गोद लेने के ख़याल से डरती है. उसे लगता है कि किसी बच्चे को अपने जीवन में लाना आसान नहीं होगा.
ये
पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की दो अलग-अलग सभाओं (राजस्थान के जयपुर और छत्तीसगढ़ के भिलाई) में पुरुषों ही नहीं महिलाओं की काले रंग की चुन्नियां और अंतर्वस्त्रों जांच करने की ख़बर सामने आई है.
यह एक अश्लीलता तो है ही और आम नागरिकों के सम्मान पर आक्रमण से कम नहीं है.
पर ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. बीते जुलाई और अगस्त में इलाहाबाद और पुणे में अमित शाह की रैलियों में भी काले कपड़े प्रतिबंधित किए गए.
एक तरह से प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों के दौरान काले रंग पर 2016 से ही अघोषित पाबंदी है और अब जब पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा हो चुकी है, इन दोनों नेताओं की जनसभाओं की संख्या बढ़ेगी और इसी के साथ काले कपड़ों को लेकर ये सख्ती बढ़ने की गुंजाइश है.
मोदी-शाह के ख़िलाफ़ विपक्षी दलों-संगठनों द्वारा काले झंडे दिखाए जाने की घटनाएं अभी छिटपुट ही हुई हैं, लेकिन जैसे-जैसे आर्थिक-सामाजिक मोर्चों पर सरकार को लेकर लोगों में नाराज़गी दिख रही है, वैसे-वैसे प्रशासनिक चौकसी भी बढ़ रही है.
कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री को राजस्थान में और फिर तमिलनाडु में द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम द्वारा कावेरी जल-विवाद पर सरकार की टालमटोल के ख़िलाफ़ काले झंडे दिखाए गए.
उत्तर प्रदेश में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जन-असंतोष बढ़ रहा है और लखनऊ की एक छात्रा पूजा शुक्ला को जून में योगी के सामने काला झंडा दिखाने के लिए पच्चीस दिन तक जेल में रहना पड़ा.
जुलाई 2018 में जब नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश गए तो पुलिस ने पूजा शुक्ला को गड़बड़ी फैलाने की आशंका में पहले ही पकड़ लिया.जस्थान में जब मोदी की सभा में काले कपड़े ही नहीं बल्कि काली पगड़ियां पहने हुए सिख श्रोताओं को भी परेशानी उठानी पड़ी तो प्रदेश के कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा, "कांग्रेस की जनसभाओं में किसी भी रंग पर पाबंदी नहीं है. काला, पीला, हरा, नीला, लाल, नारंगी, सभी रंगों का स्वागत है."
एक सभा में राहुल गांधी भी शायद भाजपा को जवाब देने के लिए ही कह चुके हैं कि "अगर मेरी सभाओं में कुछ लोग काले झंडे दिखाते हैं तो यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है. मैं उनका स्वागत करूँगा."

Monday, October 8, 2018

巴黎气候协议在资金问题上仍存分歧

巴黎气候峰会因为两个紧密相关的问题进入加时,即对抗全球变暖谁应该承担多少资金, 以及国际社会该如何划分富裕、贫穷与其他国家。

巴黎协定的第二稿显示,来自近200个国家的观察员和数以千计的观察者认为这些棘手问题可能无法在公开辩论中解决。负责此次联合国气候变化峰会的法国外长法比尤斯 宣布,周五的所有时间将展开非正式讨论 - 双边形式或小集团形式。他希望周六上午的第三次草案可以准备就绪并且通过。

资深的气候大会观察家认为,这是目前唯一可行的方法了,但他们也指出,这样做有一定风险。有些国家可能在非正式谈判中被冷落,迫使他们在的最后一次全体会议时才来表达自己的意愿,这将会对协议造成一定的障碍。

在此之前是一段艰苦的闭门谈判。拒信, 周五晚上似乎还有两大问题并未解决 - 新兴经济国表示只要富裕国家遵守该协议具有法律约束的部分,承诺到2020年,每年募集1000亿美金的款项,才肯 接受“动态差异化”。

一个相关的问题也未解决 - 美国有意将“共同但有区别的责任” ( ), 从巴黎协议中删除,将它换成“动态差异化”。这将意味着发展中国家的经济一旦越过某个点 - 如中国和印度 - 也将承担与工业化国家类似的责任。美国希望借此控制碳排放进而遏止全球变暖 。

与此同时,由中国引导,印度支持的发展中国家反对去除CBDR这一条款。中国外交部副部长、中国代表团第一副团长刘振民表示,他希望看到CBDR “明确规定,并反映在所有支柱议题上” 。印度环境部长普普拉卡什•贾瓦德卡尔形容,这是一条无法逾越的“红线”。

而另一方面,据报导美国国务卿克里向中国和印度代表表示,含有该条款的巴黎协定将在美国国会遭到挑战。美国总统奥巴马就此问题致电中国国家主席习近平,一天前他与印度总理莫迪在电话中也就这一问题进行了长时间的交谈。在巴黎的各国与会代表和观察员都等待着最后的解决方案。

科学家发出警告,企业界表示欢迎

与此同时,科学家在研究了协议草案后警告称,大部分的条文与全球平均温升控制在1.5℃或2℃内的目标不一致。 该草案提到“碳中立”将在本世纪下半叶实现。奥斯陆国际气候和环境研究中心研究部主管斯蒂芬·卡尔贝肯则表示:“如果我们的目标是1.5℃ ,到2020年我们可能会耗尽所有的碳(排放量)预算。 ”

英国曼彻斯特大学廷德尔中心的凯文·安德森说,该草案是“只适用于北半球较富裕的群体,但对于其他弱势群体来说是危险和致命的,” 他还指出,“全球10%的人口产生了全球一半的温室气体排放量”。

但该草案受到企业界和产业团体中受到欢迎。s 绿色商业组织的爱德华·卡梅隆表示: “如果国家采用这一草案,私营部门将做为业务伙伴的来实现草案中的规划。 ” 格兰瑟姆气候变化与环境研究所的尼古拉斯·斯特恩认为,“清晰的信号是非常好,该草案清楚地表明,低碳经济将可以创收盈利,而高碳经济将会带来金融风险。

环保团体的意分歧

关注谈判多年的环保团体对于草案的意见迥异。世界自然基金会和绿色和平对于将平均气温上升到1.5℃的极限 ,而不是2℃的想法表示欢迎。他们对于审查和加速国家减排行动的提案表示欢迎。

但据新德里智库基金会的希納斯瓦米指出,富裕国家甚至没有提到从现在开始 到2020年,即巴黎协议生效的年份,他们会采取什么行动。 行动援助组织的哈吉特•辛格感叹,赔偿和追究因气候变化造成的损失与责任等问题已经在草案中被删除。

新德里科学与环境智库中心的苏尼塔·纳拉因觉得此草案极不公正。她说,以美国为首的富裕国家用尽了他们的“碳预算”,现在则限制贫困国家的“发展空间” 。

Tuesday, October 2, 2018

केंद्रीय राज्य मंत्री जीएस शेखावत ने कहा, गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने किसान नेताओं से

बिना शर्त कर्ज माफी, गन्ना मिलों का बकाया भुगतान करना, फसलों का अधिकतम मूल्य दिया जाना, खेतों के लिए मुफ्त बिजली और डीजल के दामों में कटौती की मांगों को लेकर हजारों किसानों ने मंगलवार को दिल्ली की ओर कूच किया और राष्ट्रीय राजधानी की ओर जाने वाली प्रमुख सड़कों पर यातायात बाधित किया. राष्ट्रीय राजधानी की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोंडा, बस्ती और गोरखपुर जैसे दूर-दराज की जगहों के साथ-साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना क्षेत्र से आये किसानों की भीड़ नजर आ रही थी. उत्तर-प्रदेश से लगने वाली सीमा पर स्थित पुलिस चौकियों में धारा 144 (निषेधाज्ञा) लागू होने के कारण पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने, किसी तरह की सार्वजनिक बैठक आयोजित करने

, एम्प्लीफायर, लाउडस्पीकर और इसी तरह के किसी अन्य उपकरणों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गयी है. हरिद्वार में टिकैत घाट से 23 सितंबर को शुरू हुई किसान क्रांति यात्रा में उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से किसान शामिल होते गये. ये लोग पैदल, बसों में या फिर ट्रैक्टर ट्रॉलियों में सवार होकर आए हैं. इन लोगों के हाथों में भारतीय किसान यूनियन के बैनर हैं. इस यूनियन ने अपनी मांगों पर दबाव बनाने के लिए मार्च का आह्वान किया है.  मेरठ से आये एक किसान हरमिक सिंह ने कहा, ‘हम सरकार से कोई भीख नहीं मांग रहे हैं. हम अपना अधिकार मांग रहे हैं.’    उन्होंने बताया कि किसान बिजली की ऊंची दरों और आसमान छूती ईंधन की कीमतों के कारण संकट में हैं. उन्होंने कहा, ‘आपको 500 रूपये का गैस ठीक लगता है क्या?’ एक अन्य किसान ने दावा किया कि तीन लाख से अधिक किसान राजघाट की ओर मार्च कर रहे हैं
किसानों को समर्थन देने के लिए  प्रमुख चौधरी अजित सिंह यूपी गेट पहुंचे 
- केंद्रीय राज्य मंत्री जीएस शेखावत ने कहा कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने किसान नेताओं से बात की है, कई मुद्दों पर सहमति बनी. उन्‍होंने कहा कि यूपी के मंत्री लक्ष्मी नारायण, सुरेश राणा किसानों से मिलने के लिए जा सकते हैं. - जेडीयू नेता के सी त्‍यागी ने कहा कि किसान शांतिपूर्वक राजघाट की तरु जा रहे थे लेकिन उनके साथ बुरा बर्ताव किया गया. उन पर लाठी चार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए. हम इसकी निंदा करते हैं.  - भारतीय किसान यूनियन के अध्‍यक्ष राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों पर पुलिस का एक्‍शन गलत है. हमारे नेता गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर रहे है और उसके बाद हम तय करेंगे कि क्‍या करना है. कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र शेखावत, यूपी के गन्ना मंत्री सुरेश राणा और मंत्री लक्ष्मी नारायण प्रदर्शनकारियों से मिलने आ सकते हैं

- भारतीय किसान यूनियन के मुताबिक, किसानों के प्रतिनिधिमंडल की इस समय केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ मुलाकात चल रही है

- किसानों को समर्थन देने  प्रमुख चौ. अजीत सिंह लगभग 1:30 तक गाज़ीपुर बार्डर पहुंचेंगे

- दिल्ली पुलिस का किसानों को प्रस्ताव कि अगर अगर किसान शांतिपूर्ण तरीके से किसान घाट तक जाने को सहमत हो तो दिल्ली पुलिस खुद अपनी 25 बसों में बैठाकर किसानों को किसान घाट ले जाने को तैयार

- अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार किसानों से किए वादे करने में नाकाम रही, जाहिर वे विरोध करेंगे, हम किसानों के साथ हैं

- भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि हमें यहां क्यों रोक दिया गया है (यूपी-दिल्ली सीमा पर)? रैली एक अनुशासित तरीके से आगे बढ़ रही थी. अगर हम अपनी सरकार को हमारी समस्याओं के बारे में नहीं बता सकते तो हम किससे कहेंगे? क्या हम पाकिस्तान या बांग्लादेश जाए?

टिप्पणियां
  - दिल्ली आ रहे हज़ारों किसानों को यूपी गेट पर रोक दिया गया है. गाज़ीपुर और महाराजपुर बॉर्डर को सील कर दिया गया है. भारी तादाद में पुलिस की तैनाती की गई है.